प्रस्तावना
ग्राम सलारपुर, नोएडा स्थित डी.के. वाटर वाली गली में जर्जर सड़क, नाली एवं मूलभूत नागरिक सुविधाओं की समस्या को लेकर स्थानीय निवासियों के हस्ताक्षरित आवेदन, फोटो एवं वीडियो साक्ष्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी।
उद्देश्य केवल समस्या बताना नहीं, बल्कि उसे प्रमाण सहित संबंधित विभागों एवं प्रशासन तक पहुँचाना था।
शिकायत के बाद क्या हुआ?
शिकायत दर्ज होने के लगभग 5 से 6 दिनों के भीतर संबंधित विभाग द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर विभागीय आख्या उपलब्ध करा दी गई।
आख्या में क्या कमी थी?
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आख्या में केवल निर्माण कार्य न हो पाने का कारण बताया गया, लेकिन निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया गया:
- जल एवं सीवर लाइन कब तक बिछाई जाएगी?
- इसके लिए कौन-सा विभाग जिम्मेदार है?
- क्या कोई कार्ययोजना तैयार है?
- सड़क एवं नाली निर्माण की संभावित समयसीमा क्या है?
उसी रात फीडबैक देने का प्रयास
आख्या प्राप्त होने के तुरंत बाद मैंने उसी रात जनसुनवाई पोर्टल पर फीडबैक दर्ज करने का प्रयास किया।
हालाँकि तकनीकी कारणों से फीडबैक सबमिट नहीं हो सका और कई बार प्रयास करने के बावजूद पोर्टल पर त्रुटि संदेश प्राप्त होता रहा।
अगले दिन फीडबैक सफलतापूर्वक दर्ज हुआ
अगली सुबह पुनः प्रयास करने पर मेरा फीडबैक सफलतापूर्वक दर्ज हो गया।
फीडबैक में मैंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि विभागीय आख्या से मैं संतुष्ट नहीं हूँ क्योंकि उसमें केवल निर्माण कार्य न होने का कारण बताया गया है, जबकि जल एवं सीवर लाइन बिछाने की समयसीमा, कार्ययोजना एवं उसके उपरांत सड़क एवं नाली निर्माण की कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
साथ ही यह भी अवगत कराया गया कि ग्राम समाज सलारपुर की खसरा संख्या 449/1993 आबादी के रूप में दर्ज है, जहाँ वर्षों से अनेक परिवार निवास कर रहे हैं, फिर भी सड़क, नाली एवं सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएँ आज तक उपलब्ध नहीं हैं।
आगे क्या?
अब फीडबैक दर्ज हो चुका है और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई की प्रतीक्षा है। आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध शिकायत संख्या के आधार पर आगे भी वैधानिक एवं प्रशासनिक स्तर पर विषय का अनुश्रवण (Follow-up) किया जाएगा।
मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति या विभाग की आलोचना करना नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों को सड़क, नाली, जल एवं सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में रचनात्मक एवं लोकतांत्रिक प्रयास करना है।
“समस्याएँ स्वयं समाप्त नहीं होतीं, उनके समाधान की दिशा में पहला कदम किसी जागरूक नागरिक को ही उठाना पड़ता है।”

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