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| BK Thakur Noida द्वारा सामाजिक सौहार्द, कानून व्यवस्था और सनातन मूल्यों पर व्यक्त विचार |
प्रस्तावना: एक जागरूक नागरिक की चिंता
मैं, बी.के. ठाकुर, एक जागरूक नागरिक एवं सनातन परंपरा में आस्था रखने वाला व्यक्ति, देश में बीते कुछ वर्षों के दौरान घटित गंभीर घटनाओं के संदर्भ में अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहा हूँ। अब तक मैंने इस प्रकार के विचारों का खुला प्रचार नहीं किया, किंतु लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की आड़ में हो रहे अन्याय पर चुप्पी अब अस्वीकार्य है।
पालघर घटना, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सवाल
महाराष्ट्र के पालघर में 16 अप्रैल 2020 को दो साधुओं और उनके चालक की भीड़ द्वारा हत्या की घटना ने यह दिखाया कि अफ़वाहों और उन्मादी मानसिकता के कारण कानून-व्यवस्था किस हद तक ध्वस्त हो सकती है। इसी प्रकार दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों ने सामाजिक विश्वास को गहरी चोट पहुँचाई है। वर्ष 2025 में दिल्ली के ज्योति नगर/अशोक नगर क्षेत्र में एक युवती को छत से धक्का दिए जाने की घटना में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपी मुस्लिम युवक था, जिसने पहचान छिपाने के लिए बुर्क़ा पहनकर पीछा किया; पुलिस द्वारा हत्या का मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई।
गाज़ियाबाद (लोनी) में यूट्यूबर सलीम पर हमला: वैचारिक असहमति, बढ़ती सामाजिक कटुता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद (लोनी) क्षेत्र में 2026 में यूट्यूबर सलीम वास्टिक पर हुआ जानलेवा हमला इस तथ्य की ओर संकेत करता है कि वैचारिक असहमति के प्रति असहिष्णुता किस प्रकार हिंसा का रूप ले सकती है। यह हमला ऐसे समय सामने आया जब वे सार्वजनिक रूप से अपने विचार व्यक्त कर रहे थे और धार्मिक-सामाजिक विषयों पर खुली आलोचना कर रहे थे। वहीं ‘थूक जिहाद’, ‘यूरिन जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘लव जिहाद’, गौ-तस्करी जैसे मामलों सहित अनेक संगठित आपराधिक गतिविधियों को एक विचारधारात्मक रंग देकर दिन-प्रतिदिन तेज़ी से बढ़ाया जा रहा है, जिनकी व्यापकता और प्रभाव का वास्तविक आकलन करना भी कठिन होता जा रहा है। वर्तमान में हुई घटना पर मुस्लिम समुदाय को कहना चाहूंगा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधारशिला है; उससे असहमति का उत्तर संवाद हो सकता है, हिंसा नहीं।
संविधान, धर्मनिरपेक्षता और नागरिक जिम्मेदारी
वहीं दिल्ली में 2024 के दौरान चुनावी गतिविधियों के बीच कन्हैया कुमार से जुड़ा हमला/विवाद राजनीतिक और सामाजिक तनाव को रेखांकित करता है। केरल के मराड (2003) जैसी घटनाएँ यह स्मरण कराती हैं कि साम्प्रदायिक हिंसा के दुष्परिणाम लंबे समय तक समाज को प्रभावित करते हैं।
निष्पक्ष कानून व्यवस्था और न्याय की आवश्यकता
मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि संविधान मेरे लिए सर्वोपरि है और धर्मनिरपेक्षता भारत की मूल आत्मा है। किंतु यदि धर्मनिरपेक्षता की आड़ में हिंसा, अफ़वाहों और अपराधों को अनदेखा किया जाए, तथा बहुसंख्यक समाज की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान को लगातार आघात पहुँचे, तो उस पर प्रश्न उठाना प्रत्येक जागरूक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। समाधान किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि कानून के समान और निष्पक्ष पालन, त्वरित जाँच और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई में निहित है।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जिम्मेदार नेतृत्व का चयन
मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि वे विवेकपूर्ण निर्णय लें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसे जनप्रतिनिधियों का चयन करें जो राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता, महिला-सुरक्षा और कानून के सम्मान में विश्वास रखते हों, न कि तुष्टिकरण और विभाजन की राजनीति में।
गौ संरक्षण के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व
इसके साथ-साथ, मैं विशेष रूप से हिंदू समाज से आग्रह करता हूँ कि वे अपनी दिनचर्या में क्षण भर का समय निकालकर गौ माता के संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाएँ। अपने आसपास—कॉलोनी, कस्बा, गाँव या शहर—जहाँ कहीं भी बेसहारा, लाचार अथवा भूखी गौ माता हों, उनके संरक्षण के लिए संबंधित विभागों को सूचना देकर सहयोग करें। गौ माता का संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व है। इसकी शुरुआत हमें अपने गली-मोहल्ले और समाज से ही करनी होगी।
स्वदेशी एवं हिंदू व्यवसायों को प्राथमिकता देने की अपील: सजग, एकजुट और नैतिक समाज का संदेश

राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों पर बी.के. ठाकुर का संदेश
अंत में, मैं समाज के सभी सनातनी एवं जागरूक नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि वे अपने दैनिक जीवन में अपने समुदाय के ईमानदार, स्थानीय और स्वदेशी व्यवसायों को प्राथमिकता दें, किसी भी प्रकार की हिंसक एवं उग्र मानसिकता से दूरी बनाए रखें, सतर्क रहें, एकजुट रहें और नैतिक मूल्यों पर दृढ़ रहें। सजग रहना, एक रहना और नेक रहना ही समाज, परिवार और राष्ट्र की सुरक्षा का स्थायी मार्ग है।
— बी.के. ठाकुर
(कट्टर हिन्दू | सामाजिक कार्यकर्ता | मिथिला राज्य हेतु संघर्षरत युवा)

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